मातृ एनीमिया प्रबंधन को मजबूत करने की पहल
चिकित्सा अधिकारियों एवं स्टाफ नर्सों का प्रशिक्षण संपन्न
हर पल निगाहें ब्यूरो
रायबरेली-मातृ मृत्यु दर में कमी लाने तथा गर्भवती एवं धात्री में एनीमिया की प्रभावी रोकथाम एवं उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चिकित्सा अधिकारियो एवं स्टाफ नर्सों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को जनपद के एक होटल में उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई (यूपीटीएसयू) के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय “मातृ एनीमिया का समुचित प्रबंधन एवं एफआरयू स्तर की शुरुआत।
कार्यक्रम का उद्घाटन महानिदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. रंजना खरे द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है। एफआरयू स्तर की उपलब्धता से मध्यम एवं गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को शीघ्र एवं प्रभावी उपचार मिल सकेगा, जिससे मातृ जटिलताओं एवं मृत्यु दर में कमी आएगी।
प्रशिक्षक डॉ. अंजू अग्रवाल, विभागाध्यक्ष प्रसूति एवं स्त्री रोग, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) ने बताया कि एनीमिया के कई कारण होते हैं—अर्जित एनीमिया जैसे शरीर में आयरन की कमी, विटामिन B12 एवं फोलेट की कमी, तथा कुछ शारीरिक समस्याएं। वहीं वंशानुगत कारणों में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हुकवर्म संक्रमण भी एनीमिया का एक प्रमुख कारण है।
उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया का सबसे सामान्य कारण आयरन एवं आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होती है। आयरन की गोलियां लेने से कब्ज, उल्टी या असहजता होने के कारण कई महिलाएं आयरन फोलिक एसिड का सेवन छोड़ देती हैं, जिससे एनीमिया बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में इंजेक्टेबल FCM एक सुरक्षित एवं प्रभावी विकल्प है। इस विषय पर केजीएमयू में किए गए शोधों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके आधार पर सरकार ने इसे लागू करने का निर्णय लिया हैऔर पायलट के तौर पर सात जिलों में शुरू हो रहा है ।
प्रशिक्षण में एनीमिया की उन्होंने कहा कि महिला को सिर्फ एक डोज लगेगी जिससे कि उसे अस्पताल के बार बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेगे। FCM की पहचान, वर्गीकरण, उपचार प्रोटोकॉल, सुरक्षित उपयोग, दुष्प्रभाव प्रबंधन तथा केस आधारित चर्चाओं पर विस्तृत जानकारी दी गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि एनीमिया प्रबंधन की यह पहल निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देगी। यह मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे जनपद में सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि जनपद में कुल पाँच फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) हैं। पहले चरण में जिला महिला अस्पताल सहित सभी पाँच एफआरयू—सलोन, बछरावां, डलमऊ, लालगंज एवं ऊँचाहार से तीन-तीन स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है। भविष्य में अन्य सीएचसी के स्वास्थ्यकर्मियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान 10 एनीमिक गर्भवती महिलाओं को “पोषण पोटली” भी वितरित की गई, जिसमें आयरन युक्त खाद्य सामग्री एवं पोषण संबंधी परामर्श शामिल था। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाना एवं एनीमिया की रोकथाम को मजबूत करना है।
इस अवसर पर उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.शरद कुशवाहा, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी.एस.अस्थाना, डॉ. शिवानी शुक्ला, डा साक्षी वर्मा, हेमंत शुक्ला, यासीन अहमद जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता यूपीटीएसयू टीम एवं अन्य स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे।
