टीबी की समय पर पहचान के लिए एक्स-रे अनिवार्य
सभी उच्च जोखिम मरीजों की होगी जांच
हर पल निगाहें ब्यूरो
अमेठी-टीबी की शीघ्र पहचान और प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से टीबी की आशंका वाले सभी मरीजों का एक्स-रे कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. रतनपाल सिंह सुमन ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि टीबी की आशंका वाले मरीजों में एक्स-रे इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह बीमारी की पहचान का पहला और सशक्त माध्यम है। एक्स-रे से न केवल समय रहते उपचार शुरू किया जा सकता है, बल्कि संक्रमण के प्रसार को भी रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रमुख रणनीति शीघ्र रोगी की पहचान, टीबी से होने वाली मृत्यु दर में कमी तथा नए मामलों की रोकथाम है।
डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि एक्स-रे टीबी की पहचान के साथ-साथ संक्रमण की गंभीरता और उसके फैलाव को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डायबिटीज या एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति, धूम्रपान करने वाले, नशा या एल्कोहल का सेवन करने वाले, टीबी के पुराने मरीज, टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले सहित कुल 10 उच्च जोखिम श्रेणियों में आने वाले लोगों में टीबी होने की संभावना अधिक होती है। इन सभी श्रेणियों के व्यक्तियों का अनिवार्य रूप से एक्स-रे कराया जाएगा तथा जांच का विवरण निक्षय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
इसके लिए ओपीडी में आने वाले उच्च जोखिम वाले मरीजों का विवरण दर्ज कर उनकी पर्ची पर लाल मोहर या सितारा चिन्ह लगाया जाएगा। इसके बाद उन्हें मेडिकल ऑफिसर के पास भेजा जाएगा, ताकि प्राथमिकता के आधार पर एक्स-रे के लिए रेफर किया जा सके।
जनपद में जिला अस्पताल सहित सभी 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त दूरस्थ क्षेत्रों के लिए पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की भी व्यवस्था की गई है।
जिला क्षय रोग अधिकारी दीपक सिंह ने बताया कि कई बार टीबी के शुरुआती चरण में बलगम की जांच नेगेटिव आती है और खांसी, बुखार या वजन घटने जैसे स्पष्ट लक्षण भी दिखाई नहीं देते। ऐसे मामलों में एक्स-रे के माध्यम से फेफड़ों में संक्रमण, सूजन या धब्बों जैसे संकेत सामने आ जाते हैं। एक्स-रे से यह भी स्पष्ट होता है कि संक्रमण कितना गंभीर है और बीमारी केवल फेफड़ों तक सीमित है या शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल चुकी है।
उन्होंने बताया कि कई बार निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर या अन्य फेफड़ों के संक्रमणों के लक्षण टीबी से मिलते-जुलते होते हैं। एक्स-रे डिफरेंशियल डायग्नोसिस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि एक्स-रे में टीबी का संदेह होता है, तो पुष्टि के लिए मरीज की ट्रूनैट, सीबीनेट या बलगम की जांच कराई जाती है।
