टीबी मुक्त भारत अभियान: रायबरेली में 50 दिनों में तेज हुई स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रिया

टीबी मुक्त भारत अभियान: रायबरेली में 50 दिनों में तेज हुई स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रिया

हर पल निगाहें ब्यूरो 

रायबरेली-प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनपद में चल रहे 100 दिवसीय सघन टीबी अभियान के 50 दिन पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में जनपद में सक्रिय स्क्रीनिंग, एआई आधारित एक्स-रे सहित अन्य आधुनिक जांचों तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से टीबी रोगियों की पहचान कर उन्हें उपचार पर लाया गया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि टीबी उन्मूलन जनसहभागिता से ही संभव है। इन 50 दिनों में 20409 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। स्क्रीनिंग के दौरान चिन्हित संभावित टीबी रोगियों में पुष्टि हेतु 33650 लोगों की एक्स-रे तथा 5907 लोगों की सीबी-नैट एवं ट्रू-नैट जांचें की गईं। कुल 1647 टीबी मरीजों की पहचान हुई, जिनका उपचार प्रारंभ कर दिया गया है। इसके साथ ही 551 मरीज ऐसे भी चिन्हित हुए जिनमें टीबी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे। यह इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

लक्षण विहीन टीबी मरीजों की पहचान इस अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि ऐसे मरीजों में बीमारी होने के बावजूद खांसी, बुखार, वजन में कमी या अन्य सामान्य लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। ऐसी स्थिति में वे लंबे समय तक बिना जांच और उपचार के समाज में सामान्य रूप से सक्रिय रहते हैं, जिससे अनजाने में संक्रमण के प्रसार की आशंका बनी रहती है। समय पर पहचान न होने पर रोग गंभीर अवस्था भी ले सकता है।

इसके साथ ही इन 50 दिनों में 210 आयुष्मान आरोग्य शिविरों का आयोजन किया गया, जिनमें 16001 लोगों ने स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श प्राप्त किया।

अभियान के दौरान ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर सक्रिय स्क्रीनिंग की जा रही है, जिससे संभावित मरीजों की समय रहते पहचान सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने कहा कि टीबी पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है और नियमित दवा सेवन से मरीज पूर्णतः स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकता है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आमजन से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, वजन में कमी, बुखार या रात में पसीना आने जैसे लक्षण हों, तो वह नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर निःशुल्क जांच अवश्य कराएं।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम सिंह ने बताया कि इस अभियान में सामुदायिक सहभागिता के तहत 72 निक्षय मित्र प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान मे 1250 टीबी मरीजों को गोद लेकर पोषण पोटली प्रदान की है।

उन्होंने बताया कि एआई आधारित एक्स-रे तकनीक के उपयोग से संदिग्ध मरीजों की पहचान तेजी से की जा रही है, जिससे जांच एवं उपचार प्रक्रिया में गति आई है। जनपद को टीबी मुक्त बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, निक्षय मित्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा जनप्रतिनिधियों का सहयोग लगातार प्राप्त हो रहा है।

अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली आबादी—जैसे 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, कुपोषित लोग, डायबिटीज एवं एचआईवी से ग्रसित मरीज, टीबी के पुराने मरीज, टीबी मरीजों के संपर्क में रहने वाले लोग तथा अल्कोहल का सेवन करने वाले व्यक्तियों—की विशेष रूप से स्क्रीनिंग की जा रही है।

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