सिर्फ नाम नहीं, विचारों को अपनाए देश – मुकेश रस्तोगी
– भारत रत्न से भी ऊपर सम्मान की मांग तेज
– डॉ. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर राजनीति पर उठे सवाल
हर पल निगाहें ब्यूरो
रायबरेली-उ0प्र0 उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के प्रदेश संगठन मंत्री मुकेश रस्तोगी ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा है कि भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अम्बेडकर को “भारत रत्न” से भी बड़े किसी सर्वाेच्च सम्मान से नवाजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई सम्मान वर्तमान में मौजूद नहीं है, तो केंद्र सरकार को अम्बेडकर जी के अतुलनीय योगदान को देखते हुए एक नए सर्वाेच्च राष्ट्रीय सम्मान की स्थापना करनी चाहिए। श्री रस्तोगी ने कहा कि आज देश में लगभग सभी राजनीतिक दल डॉ. अम्बेडकर के नाम का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन उनके विचारों और सिद्धांतों को धरातल पर लागू करने में गंभीरता की कमी दिखाई देती है। उन्होंने विशेष रूप से सत्ताधारी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि अम्बेडकर जी के नाम पर योजनाओं और स्मारकों की घोषणा तो की जाती है, लेकिन सामाजिक समानता, शिक्षा और आर्थिक न्याय के मुद्दों पर ठोस कार्य अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान शासन में अम्बेडकर जी के मूल विचार – “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” को नजरअंदाज किया जा रहा है। दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों की वास्तविक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा, जो चिंताजनक है। श्री रस्तोगी ने कहा कि केवल प्रतीकात्मक सम्मान देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जीवन संघर्ष और आत्मबल का अद्वितीय उदाहरण है। अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने सामाजिक भेदभाव और छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उन्हें स्कूलों में भेदभाव सहना पड़ा, सार्वजनिक स्थानों पर अपमान झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्होंने विदेशों का रुख किया और कोलंबिया विश्वविद्यालय तथा लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च डिग्रियां हासिल कर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई। भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। उन्होंने एक ऐसे संविधान की रचना की, जिसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी दी गई। उन्होंने महिलाओं के अधिकार, श्रमिकों के हित और सामाजिक न्याय के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। श्री रस्तोगी ने यह भी कहा कि यदि देश वास्तव में अम्बेडकर जी को सम्मान देना चाहता है, तो केवल भारत रत्न पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि “संविधान शिल्पकार सम्मान” या “विश्व सामाजिक न्याय रत्न” जैसे नए सर्वाेच्च सम्मान की स्थापना की जाए, जो उनके वैश्विक योगदान को मान्यता दे सके। श्री रस्तोगी ने देश के सभी सामाजिक, व्यापारिक और राजनीतिक संगठनों से अपील की कि वे इस मांग का समर्थन करें और सरकार पर दबाव बनाएं, ताकि डॉ. अम्बेडकर जी को उनके कद के अनुरूप सर्वाेच्च सम्मान दिया जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अम्बेडकर जी के विचारों को लागू करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, न कि केवल राजनीतिक मंचों पर उनका नाम लेना।
