भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-6 के अन्तर्गत की गयी घोषणा

भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-6 के अन्तर्गत की गयी घोषणा

हर पल निगाहें ब्यूरो
रायबरेलीः- वन बन्दोबस्त अधिकारी/उप जिलाधिकारी (न्यायिक) सदर रायबरेली अहमद फरीद खान ने बताया है कि भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-4 के अधीन उत्तर प्रदेश सरकार ने विज्ञप्ति संख्या 1983/14-2-2014-4 (1)/2014 दिनांक 18.07.2014 द्वारा घोषित किया गया कि अनुसूची में उल्लिखित भूमि को आरक्षित वन के रूप में गठित करने का विनिश्चित किया गया है।
          उन्होंने बताया कि भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-6 की आवश्यकता को पूरा करने के लिये यह घोषित किया है कि भूमि के आरक्षित वन बन जाने से यह परिणाम होगा कि वन विभाग की आज्ञा या अनुमति बिना इस क्षेत्र में निम्नलिखित कार्य प्रतिबन्धित होंगे।
         उक्त क्षेत्र में प्रवेश करना। किसी भूमि पर अधिकार करना। आग लगाना, ले जाना या जलाना। पशुओं को उन पर छोड़ना या चराना। वृक्ष पातन (काटना) वृक्षों के पत्ते काटना, वृक्षों का चिरान करना, जलाना आदि या उनकी छाल उतारना। पत्थर खोदना, चूना या कोयला जलाना आदि। भूमि तोड़ना या सफाई करके खेती योग्य बनाना। वन्य जीवों को किसी भी प्रकार की क्षति पहुँचाना।  
            इन कार्यों के करने वाले व्यक्ति को भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-26 (1) के अधीन दण्डित किया जा सकता है।
           उन्होंने सर्व साधारण को यह भी सूचना दी है कि जो व्यक्ति भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-8 और 5 में वर्णित किसी अधिकार पर अपना दावा समझता है तो वन बन्दोबस्त अधिकारी रायबरेली जिला रायबरेली के सामने इस विज्ञप्ति की तारीख से 03 माह के अन्दर उपस्थित हो और अपना दावा करें या अपना दावा लिखित रूप में भेजे। आरक्षित भूमि की सूची तहसील के सूचना पट पर चस्पा है।

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