एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम की राज्य स्तरीय बैठक में लिए गये महत्वपूर्ण निर्णय
हर पल निगाहें ब्यूरो
लखनऊ-एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम की राज्य स्तरीय टास्क फोर्स बैठक अमित घोष, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की अध्यक्षता में लाल बहादुर शास्त्री भवन में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश में एनीमिया की रोकथाम एवं प्रभावी उपचार को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण एवं ठोस निर्णय लिए गए।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में एनीमिया एक प्रमुख जनस्वास्थ्य समस्या है, जिसका सीधा प्रभाव महिलाओं, शिशुओं, बच्चों एवं किशोरियों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। बच्चों, किशोरों एवं महिलाओं में एनीमिया की प्रभावी रोकथाम से न केवल स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि बच्चों एवं किशोरों के शैक्षणिक प्रदर्शन में वृद्धि, कार्यक्षमता में सुधार तथा भविष्य की सशक्त कार्यशक्ति का निर्माण भी संभव होगा। इससे प्रदेश की उत्पादकता बढ़ेगी और “विकसित उत्तर प्रदेश” के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
प्रदेश सरकार एनीमिया मुक्त भारत अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने तथा प्रत्येक परिवार तक स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सभी संबंधित विभागों के अभिसरण के माध्यम से समन्वित कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।
मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) डॉ. पिंकी जॉवेल ने कहा कि मातृ एनीमिया के प्रभावी प्रबंधन हेतु की खरीद प्रक्रिया प्रगति पर है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं में एनीमिया के उन्नत उपचार को बल मिलेगा। यह पहल मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के साथ-साथ मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
डॉ. मिलिंद वर्धन, महाप्रबंधक (शिशु स्वास्थ्य) एवं एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के नोडल अधिकारी ने आईएफए की संरचना के स्थान पर परिवर्तित करने का प्रस्ताव रखा, जिससे हीमोग्लोबिन स्तर में शीघ्र सुधार हो तथा दुष्प्रभाव कम हों। प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृत करते हुए अपर मुख्य सचिव ने यूपीएमएससीएल को नई संरचना की आईएफए गोलियों की खरीद प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
डॉ. अजय गुप्ता, अपर निदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम की डिजिटल रिपोर्टिंग प्रणाली को और प्रभावी बनाने हेतु ई-कवच पोर्टल में मॉड्यूल को सुदृढ़ करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इससे सभी आयु वर्ग के लाभार्थियों की एनीमिया जांच, उपचार एवं फॉलो-अप की सटीक एवं समयबद्ध ट्रैकिंग सुनिश्चित की जा सकेगी। प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करते हुए प्रदेश में एक समग्र डिजिटल रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया गया, जिससे एनीमिया प्रबंधन की निरंतर एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम हेतु स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, आईसीडीएस, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं पंचायती राज विभाग के अभिसरण से समन्वित कार्यवाही की जाएगी। कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए संयुक्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि सभी संबंधित विभाग मिलकर लक्ष्य आधारित क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सकें।
समुदाय की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताते हुए प्रदेश में “एनीमिया मुक्त पंचायत” एवं “एनीमिया मुक्त कक्षा/विद्यालय” पहल प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। जिला प्रशासन के सहयोग से इन पहलों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु एनएचएम द्वारा सोशल मीडिया अभियान तथा एनीमिया विषयक आवधिक न्यूज़लेटर भी प्रारंभ किया जाएगा।
