शिवगढ़ ब्लॉक में 10 से 28 फरवरी तक चलेगा आईडीए अभियान
हर पल निगाहें ब्यूरो
रायबरेली फाइलेरिया जैसी गंभीर व दीर्घकालिक बीमारी से बचाव के लिए शिवगढ़ ब्लॉक में 10 से 28 फरवरी तक सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत ब्लॉक की लगभग 1.26 लाख पात्र आबादी को फाइलेरियारोधी दवाएं—आईवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल—स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में खिलाई जाएंगी।
इसके साथ ही राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (एनडीडी) के अंतर्गत 10 फरवरी को जनपद के शहरी क्षेत्र सहित 18 ब्लॉकों में एक से 19 वर्ष की आयु वर्ग के लगभग 13.43 लाख बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा एल्बेंडाजोल दी जाएगी।
अभियान की जानकारी साझा करने के लिए बृहस्पतिवार को एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि वर्ष 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को देखते हुए एमडीए अभियान सरकार की प्राथमिकता पर है । इसी को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र की दो सदस्यीय टीम ने रायबरेली पहुंचकर अभियान की तैयारियों का जायजा लिया। फाइलेरिया, (हाथीपांव) मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला संक्रामक तथा दिव्यांगता उत्पन्न करने वाला रोग है। उन्होंने कहा कि जिले के अन्य ब्लॉकों में दवा सेवन का उच्च कवरेज प्राप्त होने के कारण वहां फाइलेरिया का प्रसार काफी कम हो गया है, इसलिए इस वर्ष केवल शिवगढ़ ब्लॉक में आईडीए अभियान संचालित किया जा रहा है।
सीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए कम से कम 90 प्रतिशत पात्र आबादी का दवा सेवन आवश्यक है, क्योंकि अधिकांश संक्रमित व्यक्ति लक्षणहीन वाहक होते हैं और अनजाने में संक्रमण फैलाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि “कोई भी पात्र व्यक्ति न छूटे” अभियान का मूल संदेश है, जो प्रदेश सरकार की फाइलेरिया उन्मूलन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आईडीए अभियान पाँच-स्तम्भीय रणनीति पर आधारित है, जिसमें WHO-अनुशंसित दवाओं का प्रत्यक्ष निगरानी में सेवन, रुग्णता प्रबंधन एवं रोकथाम, वेक्टर नियंत्रण, विभागीय समन्वय तथा जन-आंदोलन के रूप में समुदाय की भागीदारी शामिल है। इसके साथ ही डिजिटल टूल्स के माध्यम से रियल-टाइम रिपोर्टिंग एवं नए डायग्नोस्टिक उपकरणों का भी उपयोग किया जा रहा है।
नोडल अधिकारी डॉ. श्रीकृष्णा ने बताया कि यह दवा एक वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी पात्र लोगों को दी जाएगी। दवा खाली पेट नहीं लेनी चाहिए और इसे स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही खाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि दवा सेवन के बाद चक्कर या जी मिचलाने जैसे हल्के लक्षण शुभ संकेत हैं, घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह स्वतः ठीक हो जाते हैं |
जिला मलेरिया अधिकारी रमेश यादव ने बताया कि शिवगढ़ ब्लॉक में वर्तमान में 624 फाइलेरिया रोगी पंजीकृत हैं। अभियान को सफल बनाने के लिए 25 सुपरवाइजर और 280 टीमें गठित की गई हैं। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी और दवा बाद में खाने के लिए नहीं दी जाएगी। यदि किसी कारणवश घर पर दवा सेवन संभव न हो, तो आशा कार्यकर्ता के घर को डिपो के रूप में चिन्हित किया गया है, जहाँ जाकर दवा का सेवन किया जा सकता है। दवाओं एवं आवश्यक लॉजिस्टिक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है।
उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में फाइलेरिया क्लिनिक संचालित है, जहां प्रत्येक मंगलवार को रात में 10 से 12 बजे तक जांच एवं परामर्श की सुविधा उपलब्ध है। फाइलेरिया से बचाव के लिए लोगों से घर के आसपास पानी जमा न होने देने, मच्छरदानी के उपयोग और लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आशा से संपर्क करने की अपील की गई। अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 104 पर संपर्क किया जा सकता है।
इस अभियान में तकनीकी सहयोग पाथ संस्था द्वारा तथा सामुदायिक जागरूकता के लिए पीसीआई एवं सीफॉर संस्थाओं द्वारा सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, समुदाय स्तर पर पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (पीएसपी) के माध्यम से सीएचओ के नेतृत्व में जनजागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं, जिनमें स्वास्थ्यकर्मी, ग्राम प्रधान, कोटेदार सहित अन्य स्थानीय हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। डिस्ट्रिक्ट कोर ग्रुप (डीसीजी) के सदस्य और कसेहटी ग्राम के प्रधान राम सजीवन ने बताया कि फाइलेरियारोधी दवा सेवन के बाद कभी कभी दिक्कत होती है तो लोग दवा नहीं खाते हैं लेकिन यह दिक्कत अपने आप ठीक हो जाती है इसलिए फाइलेरिया से बचाव की दवा जरूर खाएं ।
डीसीजी के सदस्य फाइलेरिया मरीज जंग बहादुर सिंह ने अपने फाइलेरिया प्रभावित अंग को दिखाया और कहा वह लगभग 40 साल से इस बीमारी से पीड़ित हैं । उन्होंने कहा कि यह जो कहा जाता है कि फाइलेरिया की दवा खिलाई जा रही है गलत है यह फाइलेरिया से बचाव की दवा है।
कार्यशाला में उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.राकेश कुमार यादव, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी.एस. अस्थाना, डीसीपीएम बृजेंद्र वीसी शुक्ला, जिला मलेरिया इकाई के सदस्य, सीएमओ कार्यालय के अन्य अधिकारी व कर्मचारी सहित सहयोगी संस्था के प्रतिनिधि व मीडिया बंधु उपस्थित रहे।
