समय पर उपचार से क्लबफुट से प्रभावित बच्चे जी सकते हैं सामान्य जीवन
हर पल निगाहें ब्यूरो
रायबरेली- विश्व क्लब फुट दिवस के अवसर पर राणा बेनी माधव जिला चिकित्सालय में क्लब फुट से प्रभावित बच्चों एवं उनके परिवारों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य क्लब फुट की समय पर पहचान, शीघ्र उपचार और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए आमजन में जागरूकता बढ़ाना था।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पेंद्र कुमार, वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. एम.पी. सिंह, डॉ. प्रवीण कुमार पाल तथा डॉ. डी.पी. सरोज मौजूद रहे ।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पेंद्र कुमार ने कहा कि यदि क्लब फुट का उपचार समय पर शुरू कर दिया जाए तो बच्चों को स्थायी दिव्यांगता से बचाया जा सकता है और उन्हें सामान्य बच्चों की तरह स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सहयोगी संस्था अनुष्का फाउंडेशन स्वास्थ्य विभाग के साथ लगातार कार्य कर रही है।अनुष्का फाउंडेशन फॉर एलिमिनेटिंग क्लब फुट के सहयोग से जिला अस्पताल को प्रशिक्षित चिकित्सकों, आवश्यक उपकरणों एवं व्यवस्थित फॉलो-अप प्रणाली के माध्यम से सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि क्लब फुट से प्रभावित प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराया जा सके।विश्व क्लब फुट दिवस लोगों को जागरूक करने और परिवारों को समय पर उपचार के लिए प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के जिला प्रबंधक नितेश जायसवाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित आरबीएसके के तहत क्लब फुट से प्रभावित बच्चों की समय पर पहचान की जाती है तथा उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार के लिए रेफर किया जाता है। क्लब फुट एक जन्मजात स्थिति है, जिसमें बच्चे के पैर जन्म के समय अंदर की ओर मुड़े हुए होते हैं। यह लगभग प्रत्येक 800 नवजात शिशुओं में से एक को प्रभावित करता है। हालांकि, समय पर और सही उपचार मिलने पर ऐसे बच्चे पूरी तरह सामान्य और सक्रिय जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
जनपद में क्लब फुट उपचार सेवाएं राणा बेनी माधव जिला चिकित्सालय में उपलब्ध हैं, जहां प्रभावित बच्चों के लिए साप्ताहिक क्लब फुट क्लिनिक संचालित किए जाते हैं।
आशा एवं एएनएम सहित फ्रंटलाइन वर्कर बच्चों में शुरुआती पहचान कर उन्हें समय पर उपचार केंद्र तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साथ ही, माता-पिता की नियमित काउंसलिंग भी की जाती है, जिससे उपचार और फॉलो-अप की निरंतरता बनी रहे।
