फाइलेरिया उन्मूलन की ओर एक और कदम : जामों और मुसाफिरखाना में नाइट ब्लड सर्वे

फाइलेरिया उन्मूलन की ओर एक और कदम : जामों और मुसाफिरखाना में नाइट ब्लड सर्वे

हर पल निगाहें ब्यूरो
अमेठी फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में जनपद में प्री-ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे की तैयारी के तहत जामों एवं मुसाफिरखाना ब्लॉकों में नाइट ब्लड सर्वे आयोजित किया गया।
इसी क्रम में जामों ब्लॉक में 18 से 20 अप्रैल तक सर्वे किया गया, जिसमें 2 सेंटिनल साइट—कटारी एवं जामों—पर 300-300 तथा रेंडम साइट गौरा-गौरा में 300 व्यक्तियों के रक्त नमूने लेकर ब्लड स्लाइड तैयार की गई। गौरा-गौरा में सर्वे का शुभारंभ प्रधान प्रतिनिधि द्वारा किया गया, जिसमें पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (PSP) सदस्य शिव भुवन सिंह ने सक्रिय सहयोग दिया।
वहीं, मुसाफिरखाना ब्लॉक में 21 से 23 अप्रैल तक सर्वे आयोजित हुआ, जिसमें सेंटिनल साइट महेशपुर एवं दादरा तथा रेंडम साइट अनखरा को शामिल किया गया। अनखरा में PSP सदस्य एवं प्रधान प्रतिनिधि श्रीमती विनीता तिवारी ने सर्वे गतिविधि का शुभारंभ किया और स्वयं जांच कराकर समुदाय को जागरूक करने का संदेश दिया।
इन नाइट ब्लड सर्वे के माध्यम से प्राप्त आंकड़े जनपद में फाइलेरिया संक्रमण के स्तर का आकलन करने में सहायक होंगे और यह निर्धारित करेंगे कि क्षेत्र TAS के लिए तैयार है या नहीं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि एनबीएस फाइलेरिया संक्रमण की वर्तमान स्थिति का आकलन करने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि क्षेत्र के मानकों को पूरा करता है या नहीं।
फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण मध्य चरण है, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया जाता है कि कोई क्षेत्र आगे के चरण के लिए तैयार है या नहीं।
उन्होंने बताया कि जामों और मुसाफिरखाना ब्लॉकों में फरवरी 2025 में सर्वजन दवा सेवन अभियान (IDA) चलाया गया था तथा नवंबर 2025 में नाइट ब्लड सर्वे आयोजित हुआ था, जिसमें संक्रमण दर शून्य पाई गई थी। वर्तमान में पुनः संक्रमण की स्थिति का आकलन करने के लिए Pre-TAS की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
यदि इस सर्वे में भी संक्रमण दर शून्य या निर्धारित मानक (1% से कम) के भीतर रहती है, तो इन ब्लॉकों में लगभग छह माह बाद TAS-1 आयोजित किया जाएगा। वहीं, यदि किसी क्षेत्र में फाइलेरिया के नए मामले सामने आते हैं, तो एक माह के भीतर उस क्षेत्र में पुनः फोकल अभियान चलाकर पात्र आबादी को फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जाएंगी।
उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा संस्था पीएसपी के सदस्यों ने लोगों को जांच में सहयोग करने के लिए जागरूक किया |
नाइट ब्लड सर्वे रात 10 बजे के बाद किया जाता है, क्योंकि फाइलेरिया परजीवी रात के समय रक्त में अधिक सक्रिय होते हैं, जिससे उनकी पहचान करना आसान हो जाता है।

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